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Happy Dussehra: अपने प्रियजनों को दें इन Whatsapp और फेसबुक Photos, SMS के जरिए शुभकामनाएं - Jansatta

Happy Dussehra 2017 Wishes, GIF Images Hindi: दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, अगर इस अच्छाई की जीत यानि दशहरा की बधाई इन फेसबुक और व्हॉट्सएप इमेजिस के जरिए दें। Author जनसत्ता ऑनलाइन September 30, 2017 11:20 AM. 182. Shares. Share. Next. X. Happy Dussehra 2017: दशहरे पर दें प्रियजनों को शुभकामनाएं। Happy Dussehra 2017: भारत वर्ष में मनाए जाने वाले सारे त्योहार किसी ना किसी रुप में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं, लेकिन उनमें सबसे मुख्य त्योहार दशहरा है। हिंदू पंचाग के अनुसार अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी कहा जाता है। ये हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक ...और अधिक »

Happy Dussehra 2017: इन SMS के जरिए अपने प्रियजनों को फेसबुक और व्हॉट्सएप पर भेजें दशहरा की बधाई - NDTV Khabar

देश में मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक त्योहार दशहरा भी है. असत्य पर सत्य की विजय के तौर पर जाना जाने वाला ये त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान राम ने बुराई के प्रतीक माने जाने वाले रावण का वध किया था. Written by: Himanshu Kothari, Updated: 30 सितम्बर, 2017 1:35 PM. Share. ईमेल करें. टिप्पणियां. Happy Dussehra 2017: इन SMS के जरिए अपने प्रियजनों को फेसबुक और व्हॉट्सएप पर भेजें. दशहरा 2017: दशहरा का त्‍योहार पूरे देश में मनाया जाता है. देश में मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक त्योहार दशहरा भी है. असत्य पर सत्य की विजय के तौर पर जाना ...और अधिक »

...इस मंदिर में होती है रावण की पूजा, दशहरे के दिन नहीं खोले जाते कपाट - Zee News हिन्दी

बदायूं: आम भारतीयों के मन में वैसे तो रावण एक खलनायक की तरह हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक मंदिर ऐसा भी है जहां लंकेश की विधिवत पूजा की जाती है. दशहरा पर बुराई के प्रतीक को जलाने की तैयारियों की धूम के बीच यह एक दिलचस्प तथ्य है. बदायूं शहर के साहूकार मुहल्ले में रावण का बहुत प्राचीन मंदिर है. हालांकि दशहरे के दिन इस मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते. इस मंदिर की स्थापना पंडित बलदेव प्रसाद ने लगभग 100 साल पहले की थी. बलदेव रावण को प्रकाण्ड विद्वान और अद्वितीय शिवभक्त मानकर उसकी पूजा करते थे. उनकी देखादेखी कई और लोगों ने भी मंदिर आकर पूजा शुरू कर दी. इस मंदिर में रावण ...और अधिक »

Dussehra 2017: जानिए, क्यों नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है दशहरा, क्या है इसकी पौराणिक कथा - Jansatta

Dussehra 2017, Vijay Dashami, Dasara Wishes: दशहरा नौ दिनों से जारी दुर्गा पूजा समारोह की समाप्ति का प्रतीक है। दक्षिण भारत में इस दौरान देवी दुर्गा और देवी चामुंडेश्वरी की पूजा की जाती है। Author जनसत्ता ऑनलाइन September 30, 2017 11:17 AM. 351. Shares. Share. Next. Dussehra 2017 Wishes: क्यों मनाया जाता है दशहरा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार दशहरा अश्विन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर महीने के दौरान आता है। इस पर्व को भारत में बहुत ही उत्साह के साथ से मनाया जाता है, हर राज्य में इसे विभिन्न-विभिन्न पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाने की प्रथा है।और अधिक »

Dussehra 2017: क्या आप जानते हैं दशहरे से जुड़ी ये रोचक बातें - Firstpost Hindi

देश भर में 30 सितंबर को दशहरा मनाया जाएगा. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य को विजय दिलाई थी. दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग रावण दहन करेंगे. माना जाता है कि इस दिन रावण के पुतले को जलाने के साथ ही समाज से बुराइयों का भी सफाया हो जाता है. जानें इस पावन पर्व से जुड़ी कुछ रोचक बातें... An artist dressed as demon King Ravana acts in a religious play during Vijaya Dashmi,. - भारत के अलावा नेपाल और बांग्लादेश में भी दशहरा बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. वहीं मलेशिया में तो इसके लिए ऑफिशियल छुट्टी भी है. - कुल्लू का दशहरा देश भर में ...और अधिक »

विजयादशमी पर्व : रावण के दस सिर 10 बुराई के प्रतीक हैं - Webdunia Hindi

30 सितंबर को विजयादशमी पर्व है। असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। विजयादशमी के ही दिन मर्यादा पुरुषोत्तम् भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसी दिन को स्मरण करने लिए प्रतिवर्ष हम विजयादशमी का उत्सव मनाते हैं जिसमें रावण के पुतले का दहन किया जाता है। रावण के पुतले के दहन के साथ हम यह कल्पना करते हैं कि आज सत्य की असत्य पर जीत हो गई और अच्छाई ने बुराई को समाप्त कर दिया। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो पाता है! सनातन धर्म की यह परम्पराएं केवल आंख मूंद कर इनकी पुनुरुक्ति करने के लिए नहीं हैं। बल्कि यह परम्पराएं तो हमें इनके पीछे छिपे गूढ़ उद्देश्यों को स्मरण रखने ...और अधिक »

विजयदशमी 2017: रावण की पूजा के लिए साल में सिर्फ एक बार खुलता है ये मंदिर - Firstpost Hindi

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा शनिवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. जहां आज यानी शनिवार के दिन भगवान श्रीराम की पूजा और आराधना हो रही है, वहीं कानपुर में एक ऐसा मंदिर भी जहां सुबह से ही लोग दशानन रावण की पूजा करते हैं. साल में एक बार ही खुलता है रावण का मंदिर. कानपुर के शिवाला इलाके में स्थित दशानन मंदिर में शनिवार सुबह से भक्त रावण की पूजा अर्चना करने के लिए उमड़ रहे हैं. ये मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के दिन ही खुलता है और लोग सुबह-सुबह यहां रावण की पूजा करते हैं. शक्ति के रूप में रावण की होती है पूजा. दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप ...और अधिक »

बार-बार पैदा होने वाली अपनी बुराइयों के खात्मे का पर्व है दशहरा - नवभारत टाइम्स

विनोद कुमार यादव दशहरे का आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में भावार्थ है- व्यक्ति की दस प्रकार की दुष्प्रवृत्तियों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को हरने वाला उत्सव। दरअसल, शारदीय नवरात्रों के समापन पर विजयादशमी का पर्व मनुष्य को उसकी इन दस बुराइयों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। नौ दिन तक व्रत-उपवास, सूक्ष्म व स्थूल कर्मेंद्रियों की शुचिता और आत्म-अनुशासन के माध्यम से विषय-विकारों पर विजय प्राप्ति के उपलक्ष्य में विजयादशमी का आयोजन स्वाभाविक उत्सव बन जाता है। हर साल हम रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन करके अपने भीतर रमण ...और अधिक »

रावण के थे दस सर या था भ्रम, जानें क्या कहती है मान्यताएं - Hindustan हिंदी

विजयदशमी का पर्व 30 सितंबर को मनाया जाएगा। विजयदशमी के दिन भगवान राम के हाथों से रावण का अंत हुआ था। रावण एक महान पंडित होने के साथ ही भगवान शिव का परम भक्त भी था। रावण के बारे में सभी को पता है कि उसके दस सर थे। लेकिन क्या उसके सच में दस सर थे? इसको लेकर कई मान्यताएं है. 2/4. रावण की मां ने दिए थे उसे 9 मोती. रावण की मां ने दिए थे उसे 9 मोती. एक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि रावण के 10 सिर थे ही नहीं। रावण की मां ने उसे एक नौ मोतियों की माला दी थी। नौ मोतियों की माला पहनने के बाद ऐसा लगता था कि रावण के 10 सिर हैं। यह महज दृष्टिभ्रम था कि रावण के 10 सिर थे। 3/4 ..जब रावण ने ...और अधिक »

Dussehra 2017: कानपुर का ये मंदिर नहीं नकारता ज्ञान, रावण को मानता है भगवान - Oneindia Hindi

कानपुर। अधर्म पर धर्म की और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक रावण का व्यक्तित्व शायद ऐसा ही है कि हम सरेआम रावण को दोषी मानते हैं। साथ ही उसका पुतला तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जलाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रावण का यही व्यक्तित्व उसकी पूजा भी कराता है। पूरे देश में विजयदशमी में रावण के पुतले को जलाया जाता है। वहीं उत्तर प्रदेश में कानपुर एक ऐसी जगह है जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं यहां पूजा करने के लिए रावण का मंदिर भी मौजूद है जो केवल दशहरे के मौके पर खोला जाता है। कानपुर का ये मंदिर रावण को मानता है भगवान. रावण का ये मंदिर उद्दोग ...और अधिक »