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बार-बार पैदा होने वाली अपनी बुराइयों के खात्मे का पर्व है दशहरा - नवभारत टाइम्स

दशहरे का आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में भावार्थ है- व्यक्ति की दस प्रकार की दुष्प्रवृत्तियों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को हरने वाला उत्सव। दरअसल, शारदीय नवरात्रों के समापन पर विजयादशमी का पर्व मनुष्य को उसकी इन दस बुराइयों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। नौ दिन तक व्रत-उपवास, सूक्ष्म व स्थूल कर्मेंद्रियों की शुचिता और आत्म-अनुशासन के माध्यम से विषय-विकारों पर विजय प्राप्ति के उपलक्ष्य में विजयादशमी का आयोजन स्वाभाविक उत्सव बन जाता है। हर साल हम रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन करके अपने भीतर रमण करने वाले राम रूपी चैतन्य आत्मा को सहेजने का संकल्प लेते हैं। किंतु हर बार हमारे अंत:करण का एक कोना पारस्परिक ...और अधिक »

विजयादशमी 2017: इन SMS के जरिए अपने प्रियजनों को फेसबुक और व्हॉट्सएप पर भेजें बधाई संदेश - India.com हिंदी

नई दिल्ली: विजयादशमी या दशहरा नवरात्रि के अंत में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है. दशहरे का त्योहार 10 दिनों तक चलता है और दसवें दिन यानि दशमी वाले दिन यह पर्व समाप्त होता है. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार दशहरा अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस साल दशहरा 30 सितंबर (शनिवार) को मनाया जा रहा है. दशहरा संस्कृत का शब्द है, जिसका मतलब होता है रावण की हार. कई कथाओं में रावण को महान ज्ञानी और संत बताया गया है, लेकिन उसमें निहित बुराइयों के कारण उसका अंत हो गया, इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. भगवान राम ने रावण पर जीत हासिल की थी. यह त्योहार उसी जीत का प्रतीक है. जीवन में इस दिन से हमें ...और अधिक »

लाभ हेतु विजय पर्व पर विजय काल में शुरु करें नए काम - नवभारत टाइम्स

नवरात्रि के 9 दिन के उपवास के बाद भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि के बाद की तिथि को दशहरा के रूप में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अश्विन महीने के दसवें दिन हर वर्ष इस पर्व को सेलिब्रेट किया जाता रहा है। दशहरा को विजयादशमी या आयुधपूजा के नाम से भी जाना जता है। दशहरा संस्कृत का शब्द है, जिसका मतलब होता है रावण की हार। कई कथाओं में रावण को महान ज्ञानी और संत बताया गया है, लेकिन उसमें निहित बुराइयों के कारण उसका अंत हो गया। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है। किवदंतियां कहती हैं कि भगवान राम ने रावण पर जीत हासिल की थी। यह त्योहार उसी जीत का प्रतीक है। जीवन में इस दिन ...और अधिक »

दशहरे से जुड़ा है श्रीराम के नेत्र निकालने का किस्सा - दैनिक भास्कर

दशहरा को आखिर बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में क्यों मनाया जाता है ? ऐसी क्या मान्यता है ? दशहरे से जुड़ा है श्रीराम के नेत्र निकालने का किस्सा. दशहरा यानि विजयादशमी का त्योहार जल्द ही आने वाला है। जहां 21 सितंबर यानि गुरुवार से नवरात्रि शुरू हो रहे हैं वहीं 30 सितंबर को विजयादशमी है। हिंदू धर्म में दशहरे के त्योहार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये त्योहार 9 दिनों तक चलता है और 10वें दिन रावण का पुतला जलाया जाता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। दशहरा को आखिर बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में क्यों मनाया जाता है ? ऐसी क्या मान्यता है ? इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन सभी का सार एक ही है - बुराई ...और अधिक »

वो 7 जगहें जहां अब भी रावण को पूजते हैं लोग - दैनिक भास्कर

हमारे देश में ही कई ऐसी जगह हैं जहां पर रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि रावण को पूजा जाता है। वो 7 जगहें जहां अब भी रावण को पूजते हैं लोग. दशहरा या विजयादशमी...एक ऐसा दिन जब रावण के पुतले को जलाया जाता है और उसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। दशकों से दशहरा का पर्व हिंदू धर्म में इसी तरह मनाया जाता रहा है। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय पाई थी और अपनी पत्नी यानि देवी सीता को उसकी कैद से वापस ले आए थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में ही कई ऐसी जगह हैं जहां पर रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि रावण को पूजा जाता है । आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में जहां रावण की ...और अधिक »

Dussehra 2017: क्या आप जानते हैं दशहरे से जुड़ी ये रोचक बातें - Firstpost Hindi

देश भर में 30 सितंबर को दशहरा मनाया जाएगा. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य को विजय दिलाई थी. FP Staff Updated On: Sep 30, 2017 01:55 PM IST. 0. Dussehra 2017: क्या आप जानते हैं दशहरे से जुड़ी ये रोचक बातें. देश भर में 30 सितंबर को दशहरा मनाया जाएगा. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य को विजय दिलाई थी. दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग रावण दहन करेंगे. माना जाता है कि इस दिन रावण के पुतले को जलाने के साथ ही समाज से बुराइयों का भी सफाया हो जाता है. जानें इस पावन पर्व से जुड़ी कुछ रोचक बातें... An artist dressed as demon King Ravana acts in a religious play during Vijaya Dashmi,. - भारत के अलावा नेपाल ...और अधिक »

...इस मंदिर में होती है रावण की पूजा, दशहरे के दिन नहीं खोले जाते कपाट - Zee News हिन्दी

बदायूं शहर के साहूकार मुहल्ले में रावण का बहुत प्राचीन मंदिर है. दशहरे के दिन इस मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते. भाषा भाषा | Updated: Sep 29, 2017, 08:43 PM IST. कमेंट देखें | ...इस मंदिर में होती है रावण की पूजा, दशहरे के दिन नहीं. प्रतीकात्मक फोटो. खास बातें. उत्तर प्रदेश के बदायूं में है रावण का मंदिर; मंदिर की स्थापना पंडित बलदेव प्रसाद ने की थी; बलदेव रावण को अद्वितीय शिवभक्त मानकर पूजा करते थे. बदायूं: आम भारतीयों के मन में वैसे तो रावण एक खलनायक की तरह हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक मंदिर ऐसा भी है जहां लंकेश की विधिवत पूजा की जाती है. दशहरा पर बुराई के प्रतीक को जलाने की तैयारियों की धूम के बीच यह एक दिलचस्प तथ्य है. बदायूं शहर के साहूकार मुहल्ले में ...और अधिक »

विजयदशमी 2017 : बुराई पर अच्छाई का दिन दशहरा पर जानें कब है विजय मुहूर्त और पूजन विधि - दैनिक जागरण

भारत में दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम ने दशानन रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्‍त करने के साथ अपना 14 वर्षो का वनवास पूरा किया था। दशहरा पूजन का मुहूर्त एवं तिथि. दशहरा हिंदूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी अथवा दशहरे के रुप में देशभर में मनाया जाता है। इस दिन ब्राह्मण सरस्वती पूजन और क्षत्रिय शस्त्र पूजन करते हैं। इस दिन ब्राह्मण शास्त्रों का पूजन करता है। व्यापार से जुड़े लोग अपने प्रतिष्ठान आदि का पूजन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है उसमें जीवनभर निराशा नहीं मिलती। दशहरा पर विजय मुहूर्त 14:08 से 14:55 बजे तक है। अपराह्न पूजा समय का समय 13:21 से 15:42 तक है ...और अधिक »

साल में सिर्फ दशहरे के दिन खुलता है ये मंदिर, रावण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मुरादें मांगते हैं लोग - First India News

कानपुर। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक पर्व दशहरा पर आज दशानन रावण को देशभर में ​वध किया जाएगा, लेकिन महाज्ञानी रावण के ज्ञान को लेकर इससे पूर्व उसकी पूजा अर्चना भी जाती है। देशभर में भले ही रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता हो, लेकिन उसके ज्ञान और महानता के कारण कुछ जगहों पर उसे पूजा भी जाता है। देश में ही एक जगह ऐसी भी है, जहां दशहरे के दिन रावण की विशेष पूजा की जाती है और वो भी उसके मंदिर में। खास बात ये है कि रावण का ये मंदिर पूरे साल में सिर्फ दशहरे के दिन ही खुलता है। उत्तर प्रदेश मे कानपुर के शिवाला इलाके में स्थित देश के एकलौते दशानन मंदिर में आज दशहरा के अवसर पर सुबह से ही रावण की पूजा अर्चना करने के लिए भक्त उमड़ रहे हैं। गौरतलब है ...और अधिक »

विजयादशमी पर्व : रावण के दस सिर 10 बुराई के प्रतीक हैं - Webdunia Hindi

30 सितंबर को विजयादशमी पर्व है। असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। विजयादशमी के ही दिन मर्यादा पुरुषोत्तम् भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसी दिन को स्मरण करने लिए प्रतिवर्ष हम विजयादशमी का उत्सव मनाते हैं जिसमें रावण के पुतले का दहन किया जाता है। रावण के पुतले के दहन के साथ हम यह कल्पना करते हैं कि आज सत्य की असत्य पर जीत हो गई और अच्छाई ने बुराई को समाप्त कर दिया। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो पाता है! सनातन धर्म की यह परम्पराएं केवल आंख मूंद कर इनकी पुनुरुक्ति करने के लिए नहीं हैं। बल्कि यह परम्पराएं तो हमें इनके पीछे छिपे गूढ़ उद्देश्यों को स्मरण रखने एवं उनका अनुपालन करने के लिए बनाई गई हैं। आज हम ऐसी अनेक सनातनधर्मी परम्पराओं का पालन तो करते ...और अधिक »