जिले भर में आज मातम के साथ निकालेंगे ताजियों के जुलूस - दैनिक भास्कर

राजसमंद | जिलेभरमें हजरत इमाम हुसैन की याद में रविवार का ताजिये का जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस राजसमंद, रेलमगरा,... राजसमंद | जिलेभरमें हजरत इमाम हुसैन की याद में रविवार का ताजिये का जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस राजसमंद, रेलमगरा, कुरज, कुंवारिया, कुंभलगढ़, देवगढ़, आमेट, लसानी में मुस्लिम समुदाय की ओर से मातम मनाते हुए ताजिये का जुलूस निकाला जाएगा। राजनगर में दोपहर 12 बजे हुसैनी चौक से ही जुलूस रवाना होगा। देवगढ़ जामा मस्जिद, छीपों के मोहल्ले में स्थित मदीना मस्जिद और शेखों के मोहल्ले में स्थित मदरसे में दिन में ताजियों का जलसा निकलेगा। आमेट हजरत इमाम हसन ...

'हुसैन जैसा शहीदे आजम जहां में कोई हुआ नहीं' - दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता, बरेली : मुहर्रम के चांद की नौ तारीख (शनिवार) को इमामबाड़ों और घरों में उलमा की महफिल सजी। उलमा ने शहीदाने कर्बला पर रोशनी डाली। बाकरगंज ईदगाह कमेटी की ओर से इमामबाड़ा में हजरत इमाम हुसैन की शान में प्रोग्राम हुआ। इसमें डॉ. सरताज हुसैन ने शहीदाने कर्बला पर रोशनी डाली। पुराना शहर के रोहली टोला में उलमा ने चांद की नौ और दस तारीख को रोजा रखने की सलाह दी। बोले, मुहर्रम के अशूरा पर रोजा रखने का सबसे ज्यादा सवाब है। नमाज पाबंद होने की ताकीद की। साथ ही कुरान के मुताबिक जिंदगी गुजारने की बात कही। अकीदतमंदों ने लंगर बांटा। खानकाह-ए-नियाजिया पर भी ...

सोगवारों ने मातमी जुलूस निकाला - अमर उजाला

नानौता (सहारनपुर)। मुहर्रम की नौ तारीख को शिया समुदाय के सोगवारों ने हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में एक मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस इमाम बारगाह सब्जवारियान से शुरू होकर इमाम बारगाह छत्ता पर संपन्न हुआ। जुलूस में नगर की चारों अंजुमनों ने सीनाजनी की। जुलूस से पूर्व इमाम बारगाह सब्जवारियान में मजलिस के दौरान हजरत इमाम हुसैन और अन्य शहीदों की शहादत को याद किया गया। मजलिस के बाद इमाम बारगाह से अलम और जुलजुनाह बरामद की गयी। इसके बाद मातमी जुलूस में इमाम बारगाह कोट से जुलजुनाह बरामद की गई। यह जुलूस इमाम बारगाह महल, इमाम बारगाह कोट, कसरे जैहरा ...

मुहर्रम – ताजिया क्यों मनाते हैं, क्या है ताज़िया का महत्व – पढ़े यहां - Times Bull

मुहर्रम इस्लामिक धर्म के लोगो द्वारा एक मातम का दिन है इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम यानि मुहर्रम ताज़िया मनाया जाता है। इमाम हुसैन अल्लाह के रसूल (मैसेंजर) पैगंबर मोहम्मद के नाती थे। मुहर्रम हिजरी संवत का प्रथम महीना है। इस बार मुहर्रम ताज़िया रविवार यानि की 1 अक्टूम्बर को मनाया जायेगा इस दिन इस्लाम को मानाने वाले यानि मुसलमानो में मातम छाया रहता है। मुहर्रम के दिन शिया मुसलमानों के द्वारा एक इमाम हुसैन का मातम मानते हुए खुद को कोड़ो से मारा जाता है। पुरे शहर में उनके जुलूस को घुमया जाता है और अंत में मस्जिद के पास दफना दिया जाता है । Related Posts.

मुहर्रम में क्या और क्यों होता है - नवभारत टाइम्स

आज मनाया जा रहा मुहर्रम का त्योहार इस्लामी साल का पहला महीना कहलाता है। जिसे उर्दू जबान में हिजरी कहा जाता है। इतना ही नहीं इस्लाम के चार पवित्र महीनों में इस महीने की अपनी अलग अहमियत होती है। दरअसल इराक में सन् 680 में यजीद नामक एक जालिम बादशाह हुआ करता था, जो इंसानियत का बड़ा दुश्मन था। जिसकी वजह से हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया था। इसी जंग में मोहम्मद-ए-मस्तफा के नाती हजरत इमाम हुसैन को कर्बला नामक जगह पर उनके परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था। तभी से मुहर्रम के दिन हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद किया ...

मोहर्रम पर नगर में मातमी जुलूस निकाला - अमर उजाला

खतौली(मुजफ्फरनगर)। मुहर्रम की दसवीं तारीख पर नगर में मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में ताजिया, अलम और जुलजुनाह बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने आग पर चलकर खूनी मातम किया। जुलूस नगर के मुख्यमार्गों से होता हुआ करबला शेखपुरा पहुंच कर समाप्त हुआ। करबला में ताजिये को दफनाया गया। हवा महल शेखपुरा से अली तनवीर जैदी, अब्बास जैदी, समद जैदी, शुऐब जैदी के नेतृत्व में मातमी जुलूस निकाला गया। जानसठ तिराहे पर जुलूस को खिताब फरमाते हुए मौलाना गौहर हैदर ने कहा कि आज से 1400 वर्ष पूर्व यजीद के आतंक के सामने हुसैन ने सिर नहीं झुकाया। इमाम हुसैन ने इस्लाम और इंसानियत को जिंदा ...

पानी मांगने पर अली असगर को मार दिया था तीर - दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता, हाथरस : हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत में शनिवार को नवीं तारीख पर अलम व छड़ों का जुलूस निकाला गया। यजीदी फौज ने बच्चों को पानी तो नही दिया लेकिन तीर मारकर नन्हें हजरत अली असगर को शहीद कर दिया। उन्हीं की याद में नवी तारीख मनाई जाती है। आल इंडिया शिया सोसाइटी के बैनर तले जुलूस भी निकला गया। मजलिसों में भी हजरत इमाम हुसैन की शहादत की दास्तां सुनाई गई। मौलाना सैयद सज्जाद ने फरमाया कि हजरत इमाम हुसैन और मुहर्रम की सातवीं तारीख से करबला में यजीद ने पानी बंद कर दिया था। हजरत इमाम हुसैन के छोटे-छोटे बच्चे ...

गूंजे या अली, या हुसैन के नारे - अमर उजाला

मैनपुरी/करहल। हजरत इमाम हुसैन की याद में अलमों और ताजियों का जुलूस निकाले जाने का सिलसिला जारी है। मजलिसों में इमाम हुसैन की याद की जा रही है। नगर के कई मोहल्लों से अलग-अलग अलम निकाले जा रहे हैं। इमाम हुसैन की याद में लोगों में गम का माहौल है। अलमों को निकालने वाले अली का लश्कर या हुसैन जैसे नारे लगा रहे थे। चांद की नौमी तारीख को देर शाम सभी ताजियों ने इमाम चौक से आकर बड़ा चौहारा पर सलामी दी। इमामबाड़ा से शुरू हुआ ताजियों का गश्त बड़े चौराहे पर पहुंचा। यहां रात भर इमाम हसन-हुसैन की याद में अखाडे़दारों ने जमकर तलवार से अखाड़ा किया। मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष ...

ताजिये रख देर रात तक की जियारत - अमर उजाला

एटा। शहर में शनिवार को ताजिए रखकर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। लोगों ने ताजियों कह जियारत कर दुआ मांगी। इस दौरान हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम मनाया गया। वहीं शहर के रेवाड़ी मोहल्ला, मारहरा दरवाजा, किदवईनगर, होली मोहल्ला और इस्लामनगर में ताजियों को सजाया गया। सोमवार सुबह करबला में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ताजियों को लेकर समाज के युवा वर्ग में खासा उत्साह नजर आया। जीशान ने बताया कि ताजिये के जरिये हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। इमाम हुसैन ने इस्लाम की रक्षा के लिए कुर्बानी दी। उन्होंने बताया कि सोमवार को करबला में ...

Muharram 2017 : मुहर्रम क्या हैं कब मनाया जाता हैं। ,ताज़िया का जुलूस क्यों निकला जाता हैं। - Times Bull

Happy Muharram 2017 : मुहर्रम क्या हैं कब मनाया जाता हैं। क्या है ताजिया जुलूस का महत्व. MuharramFestival · By Times Bull Last updated Oct 1, 2017 0 · Muharram 2017. मुहर्रम का इस्लामी महीना यानि इस्लामी नया साल की शुरुआत है। यह पैगंबर मुहम्मद, हज़रत इमाम हुसैन के युवा पोते की शहादत की याद उनके अनुयायियों को दिलाता है। ताज़िया मुहर्रम के दिनों में मुसलमान/ शिया लोग अपने पैगंबर मुहम्मद के पोते हजरत इमाम हुसेन की कब्र के प्रतीक रूप में बनाते है। मुहर्रम का इस्लामी महीना यानि इस्लामी नया साल की शुरुआत है। यह पैगंबर मुहम्मद, हज़रत इमाम हुसैन के युवा पोते की शहादत की याद उनके अनुयायियों ...

मोहर्रम की नवीं तारीख पर निकाला मातमी जुलूस - दैनिक जागरण

नानौता (सहारनपुर) : शिया समाज के लोगों ने नोहाखानी करते हुए मोहर्रम की नवीं तारीख का मातमी जुलूस बड़े ही गमगीन माहौल में निकाला। जुलूस में गम-ए- हुसैन में बड़ों के साथ बच्चे भी मातम कर रहे थे। शनिवार को नगर के मोहल्ला कानूनगोयान स्थित इमामबारगाह सब्जवारियान से शुरू होकर मातमी जुलूस मातम करता हुआ इमामबारगाह छत्ता पहुंचा। जुलूस में शब्बर हुसैन, हाजी मो. ईसा जैदी, हाजी मोहम्मद हुसैन, बुंदु, सैय्यद शहजाद अख्तर, शाहनवाज अख्तर, सरफराज अख्तर मुन्ना, हाजी हाशिम हुसैन आदि शामिल रहे। By Jagran. मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें और मैच के Live स्कोर पाने के लिए जाएं ...

इमाम हुसैन की याद में निकाले गए ताजिये - दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता, हरिद्वार: इमाम हुसैन की याद में ज्वालापुर और आस-पास के देहात में ताजिये निकाले गए। जागरण संवाददाता, हरिद्वार: इमाम हुसैन की याद में ज्वालापुर और आस-पास के देहात में ताजिये निकाले गए। मजलिस, लंगर और फातिहाख्वानी का सिलसिला भी जारी रहा। रविवार को मोहर्रम माह की 10 तारीख पर इमाम हुसैन व करबला के शहीदों को जगह-जगह खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी। पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती और चौथे खलीफा हजरत अली के बेटे इमाम हुसैन कर्बला की जंग में शहीद हो गए थे। हक की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन असत्य के आगे नहीं झुके और अपनी शहादत से दुनिया को यह पैगाम दिया कि सत्य ...

जानिए क्यों मनाया जाता है 'मोहर्रम' पर मातम, क्या है इसका इतिहास - Hindustan हिंदी

'मुहर्रम' इस्लामी साल पहला महीना होता है। इसी महीने से इस्लाम का नया साल शुरू होता है। इस महिने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा (Day Of Ashura) कहा जाता है, इसी दिन को अंग्रेजी कैलेंडर में मोहर्रम कहा गया है। क्यों मनाया जाता है मोहर्रम मोहर्रम के महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को इराक के बयाबान में जालिम यजीदी फौज ने शहीद कर दिया था। हजरत हुसैन इराक के शहर करबला में यजीद की फौज से लड़ते हुए शहीद हुए थे। इमाम हुसैन को इस वजह से थी यजीद से नाइत्तेफाकी इस्लाम में सिर्फ एक ही खुदा की इबादत करने के लिए कहा गया है।

बड़े साहब का जुलूस निकाला, नाल साहब की सवारी आज - दैनिक भास्कर

बड़े साहब का जुलूस निकाला, नाल साहब की सवारी आज शाजापुर | मोहर्रम की आठवीं तारीख पर शुक्रवार को मुस्लिम... बड़े साहब का जुलूस निकाला, नाल साहब की सवारी आज शाजापुर| मोहर्रम की आठवीं तारीख पर शुक्रवार को मुस्लिम समाजजनों ने परंपरागत तरीके से अलम का जुलूस निकाला। करीब पांच घंटे चले जुलूस में 25 से ज्यादा अखाड़ा कलाकारों ने हैरतअंगेज कारनामे दिखाए। अलम का जुलूस खत्म होने के बाद शाम ढलते ही समाजजन हुसैनी चौक में एकत्रित होने लगे। रात 10 बजे बाद यहां चौकी पर विराजित क्षेत्र के प्रसिद्ध दुलदुल बड़े साहब का जुलूस भी निकला गया। शनिवार रात नाल साहब की सवारी मशाल ...

कत्ल की रात आज, ताजिया जुलूस कल निकाला जाएगा - दैनिक भास्कर

मुस्लिमसमुदाय की ओर से पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में 1 अक्टूबर को जिलेभर में... मुस्लिमसमुदाय की ओर से पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में 1 अक्टूबर को जिलेभर में मोहर्रम मनाया जाएगा। इस दिन मातमी धुनों के साथ ताजिया जुलूस निकाला जाएगा। इससे एक दिन पहले 30 सितंबर को कत्ल की रात मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि करीब 1400 साल पहले मोहर्रम महीने की 10वीं तारीख को कर्बला के मैदान में मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इन दिनों पैक के जरिए मोहर्रम आने का संदेश दिया जा रहा है। ताजिया ...

मुकाम पर पहुंचे ताजिए, मस्जिदों में दुआएं की - दैनिक भास्कर

कोटा| हजरतमोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम और इमाम हसन की याद में शुक्रवार रात ताजिए मुकाम पर पहुंचे। शनिवार को शहर... कोटा| हजरतमोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम और इमाम हसन की याद में शुक्रवार रात ताजिए मुकाम पर पहुंचे। शनिवार को शहर के श्रीपुरा इलाके में ताजिए घूमाए जाएंगे। रविवार को शहादत की रात को विभिन्न स्थानों पर अखाड़े निकाले जाएंगे। ताजिए जुलूस व्यवस्था समिति संयोजक पूर्व पार्षद उमर सीआईडी ने बताया कि जुमे की नमाज में शहर की सभी मस्जिदों में शहिदाने करबला वालों की याद में जिक्रे हुसैन हुआ। करबला की दास्तां पर तकरीर की गई। स्टेशन क्षेत्र में मौलाना ...

नूरानी चौक से आज निकलेगा मातमी जुलूस, तकरीर भी होगी - दैनिक भास्कर

रायपुर | अलमदारे हुसैनी ईरानी जमात की ओर से शबे आशूरा की रात यानी शनिवार रात एक मातमी जुलूस निकाला जाएगा इस्लाम... रायपुर | अलमदारे हुसैनी ईरानी जमात की ओर से शबे आशूरा की रात यानी शनिवार रात एक मातमी जुलूस निकाला जाएगा इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मोहम्मद के नवासे शहीदे करबला हजरत इमाम हुसैन की याद में यह जुलूस निकलेगा। उनकी याद में मौलाना अकील तोराबी मुंबईवाले रात 8 बजे से मजलिस तकरीर करेंगे। इसके बाद एक मातमी जुलुस ताजिया अलम के साथ निकाला जाएगा। जुलूस नूरानी चौक, नगर घड़ी चौक, औलिया चौक होते हुए बैजनाथ पारा स्थित इमाम बारगाह पहुंचेगा। यहां नौहा ...

Muharram 2017: जानिए भारत में इस वर्ष कब है मुहर्रम, नहीं है ये जश्न का दिन - Jansatta

Muharram/Ashura 2017 Date in India: मुहर्रम में एक विशेष दिन सभी मुस्लिम समाज के लोग शोक मनाते हैं। ये दिन मुहर्रम महीने का 10 वां दिन होता है। Author जनसत्ता ऑनलाइन September 30, 2017 20:29 pm. 1. Shares. Share · Next. Muharram 2017 Date India: किस दिन है इस वर्ष मुहर्रम। मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है। इसे एक बहुत पवित्र महीना माना जाता है। इसे हिजरी भी कहा जाता है। इसे मुस्लिम संप्रदाय के लोग मनाते हैं। हिजरी सन की शुरुआत इसी महीने से होती है। इस्लाम धर्म में चार पवित्र महीने होते हैं, उनमें से एक पवित्र महीना मुहर्रम का होता है। मुहर्रम शब्द में से हरम का मतलब होता है किसी ...

कौन थे इमाम हुसैन, किसने उजाड़ी थी कर्बला की बस्ती? - रिलीजन भास्कर

मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर का पहला महीना है। इस महीने में इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। Replay. Prev; |; View Again. कौन थे इमाम हुसैन, किसने उजाड़ी थी कर्बला की बस्ती? +2और स्लाइड देखें. मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर का पहला महीना है। इस महीने में इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। याजीद की सेना के विरुद्ध जंग लड़ते हुए इमाम हुसैन के पिता हजरत अली का संपूर्ण परिवार मौत के घाट उतार दिया गया था और मुहर्रम के दसवें दिन इमाम हुसैन भी इस युद्ध में शहीद हो गए थे। मुहर्रम के दसवें दिन (1 अक्टूबर, रविवार) ही मुस्लिम संप्रदाय द्वारा ताजिए निकाले जाते हैं। लकड़ी, बांस व ...