This RSS feed URL is deprecated

मुहर्रमः जानें इसमें क्या और क्यों होता है? - नवभारत टाइम्स

आज मनाया जा रहा है मुहर्रम। इस्लामी साल का पहला महीना कहलाता है। जिसे उर्दू जबान में हिजरी कहा जाता है। इतना ही नहीं इस्लाम के चार पवित्र महीनों में इस महीने की अपनी अलग अहमियत होती है। दरअसल इराक में सन् 680 में यजीद नामक एक जालिम बादशाह हुआ करता था, जो इंसानियत का बड़ा दुश्मन था। जिसकी वजह से हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया था। इसी जंग में मोहम्मद-ए-मुस्तफा के नाती हजरत इमाम हुसैन को कर्बला नामक जगह पर उनके परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था। तभी से मुहर्रम के दिन हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद किया जाने लगा है। हालांकि उस दिन लड़ी गई मजहबी जंग में जीत हुसैन की ही हुई थीं, मगर यजीद ने उनके साथ ...और अधिक »

जानिए क्यों मनाया जाता है 'मोहर्रम' पर मातम, क्या है इसका इतिहास - Hindustan हिंदी

'मुहर्रम' इस्लामी साल पहला महीना होता है। इसी महीने से इस्लाम का नया साल शुरू होता है। इस महिने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा (Day Of Ashura) कहा जाता है, इसी दिन को अंग्रेजी कैलेंडर में मोहर्रम कहा गया है। क्यों मनाया जाता है मोहर्रम मोहर्रम के महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को इराक के बयाबान में जालिम यजीदी फौज ने शहीद कर दिया था। हजरत हुसैन इराक के शहर करबला में यजीद की फौज से लड़ते हुए शहीद हुए थे। इमाम हुसैन को इस वजह से थी यजीद से नाइत्तेफाकी इस्लाम में सिर्फ एक ही खुदा की इबादत करने के लिए कहा गया है। छल-कपट, झूठ, मक्कारी, जुआ, शराब, जैसी चीजें इस्लाम में हराम बताई गई हैं। हजरत मोहम्मद ने ...और अधिक »

10 मुहर्रम: आज ही के दिन कर्बला में हुआ था हज़रत मोहम्मद के नवासे का क़त्ल - News18 इंडिया

इस्लामिक कैलेंडर के नए साल के पहले महीने का नाम 'मुहर्रम' है. 1400 साल पहले इस महीने की 10 तारीख को अल्लाह के पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) के छोटे नवासे इमाम हुसैन को उनके परिवार और 72 अनुयायियों समेत मार दिया गया था. News18Hindi. Updated: October 1, 2017, 7:28 AM IST. 10 मुहर्रम: आज ही के दिन कर्बला में हुआ था हज़रत मोहम्मद के नवासे का. क़रबला में मौजूद इमाम हुसैन का दरगाह. News18Hindi. Updated: October 1, 2017, 7:28 AM IST. इस्लामिक कैलेंडर के नए साल के पहले महीने का नाम 'मुहर्रम' है. 1400 साल पहले इस महीने की 10 तारीख को अल्लाह के पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) के छोटे नवासे इमाम हुसैन को उनके परिवार और 72 अनुयायियों समेत मार दिया गया था. इमाम हुसैन पर ये ज़ुल्म 1400 साल ...और अधिक »

मातमी जुलूस निकालकर शिया मुस्लिमों ने दिया मानवता का सन्देश - News18 इंडिया

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मुहर्रम की दसवीं तारीख पर शिया समुदाय ने मातमी जुलूस निकाला. इस जुलूस में शामिल बच्चों से लेकर बड़े तक खुद पर लोहे की चैनों से प्रहार कर रहे थे. ETV MP/Chhattisgarh Updated: October 1, 2017, 5:03 PM IST. मातमी जुलूस निकालकर शिया मुस्लिमों ने दिया मानवता का सन्देश. मध्य प्रदेश के जबलपुर में मुहर्रम की दसवीं तारीख पर शिया समुदाय ने मातमी जुलूस निकाला. इस जुलूस में शामिल बच्चों से लेकर बड़े तक खुद पर लोहे की चैनों से प्रहार कर रहे थे. ETV MP/Chhattisgarh Updated: October 1, 2017, 5:03 PM IST. मध्य प्रदेश के जबलपुर में मुहर्रम की दसवीं तारीख पर शिया समुदाय ने मातमी जुलूस निकाला. इस जुलूस में शामिल बच्चों से लेकर बड़े तक खुद पर लोहे की चैनों से प्रहार कर रहे थे. इस ...और अधिक »

इस खास दिन यहां होती है घोड़े की पूजा - News18 इंडिया

यूं तो मुहर्रम पूरे विश्व में मनाया जाता है लेकिन पूर्णिया में कुछ अलग ही अंदाज में मनाया जाता है. शहादत और मातम का त्योहार मुहर्रम के मौके पर पूर्णिया में कौमी एकता की मिशाल देखने को मिलती है. ETV Bihar/Jharkhand Updated: October 2, 2017, 10:23 AM IST. इस खास दिन यहां होती है घोड़े की पूजा. न्यूज 18 हिंदी. ETV Bihar/Jharkhand Updated: October 2, 2017, 10:23 AM IST. यूं तो मुहर्रम पूरे विश्व में मनाया जाता है लेकिन पूर्णिया में कुछ अलग ही अंदाज में मनाया जाता है. शहादत और मातम का त्योहार मुहर्रम के मौके पर पूर्णिया में कौमी एकता की मिशाल देखने को मिलती है. इस मौके पर हिन्दू मुस्लिम सभी वर्ग के लोग इमाम हुसैन के घोड़े दुलदुल की पूजा करते हैं और मनोकामना मानते हैं ...और अधिक »

इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है मुहर्रम - Samachar Jagat

इंटरनेट डेस्क। इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन है। इमाम हुसैन अल्लाह के रसूल (मैसेंजर) पैगंबर मोहम्मद के नाती थे। यह हिजरी संवत का प्रथम महीना है। मुहर्रम एक महीना है, जिसमें शिया मुस्लिम दस दिन तक इमाम हुसैन की याद में शोक मनाते हैं। इस्लाम की तारीख में पूरी दुनिया के मुसलमानों का प्रमुख नेता यानी खलीफा चुनने का रिवाज रहा है। ऐसे में पैगंबर मोहम्मद के बाद चार खलीफा चुने गए। लोग आपस में तय करके किसी योग्य व्यक्ति को प्रशासन, सुरक्षा इत्यादि के लिए खलीफा चुनते थे। जिन लोगों ने हजरत अली को अपना इमाम (धर्मगुरु) और खलीफा चुना, वे शियाने अली यानी शिया कहलाते हैं। शाम ढलने के बाद इस मंदिर में रुकना है ...और अधिक »

गमगीन माहौल में निकाला गया मोहर्रम का जुलूस - Patrika

जुलूस के दौरान मुस्लिम समाज के हुसैनी सौगवारों ने खुद को घायल कर मातम मनाया । कासगंज। जिले भर में रविवार की शाम को हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान मुस्लिम समाज के हुसैनी सौगवारों ने खुद को घायल कर मातम मनाया और इमाम हुसैन की शहादत का मकसद बयान किया। बाद में उन्होंने कर्बला में जाकर ताजियों को सुपुर्द ए खाक किया। इस मौके पर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे। इमाम हुसैन की याद में निकाला जुलूस पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ यज़ीदी फौज के साथ लड़ते हुए हक व इंसाफ के लिए शहादत दे दी थी। उनकी याद में मोहर्रम के महीने में गमगीन माहौल में जुलूस निकालते ...और अधिक »

या हुसैन की सदा के साथ आंखों से बह रहे आंसू - दैनिक जागरण

या हुसैन की सदा के साथ आंखों से बह रहे आंसू इमाम हुसैन व 72 शहीदों की याद में जगह-जगह मजलिस के आयोजन हो रहे हैं। मुजफ्फरपुर। इमाम हुसैन व 72 शहीदों की याद में जगह-जगह मजलिस के आयोजन हो रहे हैं। कमरा मोहल्ला, ब्रह्मापुरा, पैगम्बरपुर कोल्हुआ, सिपाहपुर, हसनचक बंगरा, मोहम्मदपुर मोबारक स्थित इमामबाड़ों में मौलाना करबला की दर्दनाक शहादत बयान कर रहे हैं। या हुसैन की सदा के साथ आंखों से आंसू बह रहे हैं। हसनचक बंगरा इमामबाड़ा से अली अकबर का ताबूत निकाला गया। मजलिस को मौलाना सैयद रुहुल्लाह काजमी ने खिताब किया। मौलाना ने कहा कि अली अकबर इमाम हुसैन के लाडले थे। करबला की जंग में सीने में भाला मार कर उन्हें शहीद किया गया। मौलाना के इतना बयान करते हुए लोग हाय अली ...और अधिक »

बिहार में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, साथ-साथ निकला ताजिया और विसर्जन जुलूस, देखें वीडियो - प्रभात खबर

पटना : बिहार में गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा राजधानी समेत कई जिलों में देखने को मिला. एक ओर जहां हिंदू समुदाय की महिलाओं ने अश्रुपूरित आंखों से मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए विदाई दी, वहीं दूसरी ओर मुसलिम समुदाय के लोग भी मातमी जुलूस में शामिल हुए. सहरसा में वर्षों से चली आ रही परंपरा को धरोहर बताते हुए ताजिया और प्रतिमा विसर्जन का जुलूस साथ-साथ चला. वहीं, गोपालगंज में मुसलिम थानेदार की बेगम समेत समुदाय के कई युवा दुर्गापूजा की तैयारी में अपना योगदान दिया. दुर्गापूजा में थानेदार की बेगम ने न सिर्फ सपरिवार शिरकत कीं, बल्कि हवन-पूजन सहित आरती और मंगलाचरण में भी शामिल हुईं. साथ ही उन्होंने दुर्गा के चरणों में सोने का टीका भी ...और अधिक »

करबला के शहीदों के गम में निकला विश्व का सबसे लम्बा कारवां - नवभारत टाइम्स

करबला की जंग में इमाम हुसैन संग 72 साथियों की शहादत का जख्म काशी नगरी में ताजा हो गया। उजड़े हुए कुनबे, बिखरी लाशें और आंखों में आंसू, यह सबकुछ छठी मोहर्रम को विश्व के सबसे लम्बे दुलदुल जुलूस में देखने को मिला। यह जुलूस 50 घंटे तक शहर की गलियों में चक्कर लगा अपनी मंजिल पर पहुंचेगा। छठीं मोहर्रम यानी बुधवार की रात 7.30 बजे शिया अंजुमन जव्वादिया की ओर से कच्चीसराय (दालमंडी) से निकले दुलदुल के जुलूस का इतिहास तकरीबन ढाई सौ साल पुराना है। जुलूस में हजरत अब्बास का परचम 'अलम' व दुलदुल के साथ बड़ी संख्या में लोग मातम व नौहाख्वानी करते हुए चल रहे थे। जुलूस पुराने बनारस यानी पक्का महाल की गलियों व अन्य इलाके की महज 25 किलोमीटर की दूरी 40 घंटे में तय कर आठवीं मुहर्रम के ...और अधिक »