मुहर्रम – ताजिया क्यों मनाते हैं, क्या है ताज़िया का महत्व – पढ़े यहां - Times Bull

मुहर्रम इस्लामिक धर्म के लोगो द्वारा एक मातम का दिन है इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम यानि मुहर्रम ताज़िया मनाया जाता है। इमाम हुसैन अल्लाह के रसूल (मैसेंजर) पैगंबर मोहम्मद के नाती थे। मुहर्रम हिजरी संवत का प्रथम महीना है। इस बार मुहर्रम ताज़िया रविवार यानि की 1 अक्टूम्बर को मनाया जायेगा इस दिन इस्लाम को मानाने वाले यानि मुसलमानो में मातम छाया रहता है। मुहर्रम के दिन शिया मुसलमानों के द्वारा एक इमाम हुसैन का मातम मानते हुए खुद को कोड़ो से मारा जाता है। पुरे शहर में उनके जुलूस को घुमया जाता है और अंत में मस्जिद के पास दफना दिया जाता है । Related Posts.

मुहर्रम में क्या और क्यों होता है - नवभारत टाइम्स

आज मनाया जा रहा मुहर्रम का त्योहार इस्लामी साल का पहला महीना कहलाता है। जिसे उर्दू जबान में हिजरी कहा जाता है। इतना ही नहीं इस्लाम के चार पवित्र महीनों में इस महीने की अपनी अलग अहमियत होती है। दरअसल इराक में सन् 680 में यजीद नामक एक जालिम बादशाह हुआ करता था, जो इंसानियत का बड़ा दुश्मन था। जिसकी वजह से हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया था। इसी जंग में मोहम्मद-ए-मस्तफा के नाती हजरत इमाम हुसैन को कर्बला नामक जगह पर उनके परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था। तभी से मुहर्रम के दिन हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद किया ...

पानी मांगने पर अली असगर को मार दिया था तीर - दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता, हाथरस : हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत में शनिवार को नवीं तारीख पर अलम व छड़ों का जुलूस निकाला गया। यजीदी फौज ने बच्चों को पानी तो नही दिया लेकिन तीर मारकर नन्हें हजरत अली असगर को शहीद कर दिया। उन्हीं की याद में नवी तारीख मनाई जाती है। आल इंडिया शिया सोसाइटी के बैनर तले जुलूस भी निकला गया। मजलिसों में भी हजरत इमाम हुसैन की शहादत की दास्तां सुनाई गई। मौलाना सैयद सज्जाद ने फरमाया कि हजरत इमाम हुसैन और मुहर्रम की सातवीं तारीख से करबला में यजीद ने पानी बंद कर दिया था। हजरत इमाम हुसैन के छोटे-छोटे बच्चे ...

गूंजे या अली, या हुसैन के नारे - अमर उजाला

मैनपुरी/करहल। हजरत इमाम हुसैन की याद में अलमों और ताजियों का जुलूस निकाले जाने का सिलसिला जारी है। मजलिसों में इमाम हुसैन की याद की जा रही है। नगर के कई मोहल्लों से अलग-अलग अलम निकाले जा रहे हैं। इमाम हुसैन की याद में लोगों में गम का माहौल है। अलमों को निकालने वाले अली का लश्कर या हुसैन जैसे नारे लगा रहे थे। चांद की नौमी तारीख को देर शाम सभी ताजियों ने इमाम चौक से आकर बड़ा चौहारा पर सलामी दी। इमामबाड़ा से शुरू हुआ ताजियों का गश्त बड़े चौराहे पर पहुंचा। यहां रात भर इमाम हसन-हुसैन की याद में अखाडे़दारों ने जमकर तलवार से अखाड़ा किया। मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष ...

ताजिये रख देर रात तक की जियारत - अमर उजाला

एटा। शहर में शनिवार को ताजिए रखकर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। लोगों ने ताजियों कह जियारत कर दुआ मांगी। इस दौरान हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम मनाया गया। वहीं शहर के रेवाड़ी मोहल्ला, मारहरा दरवाजा, किदवईनगर, होली मोहल्ला और इस्लामनगर में ताजियों को सजाया गया। सोमवार सुबह करबला में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ताजियों को लेकर समाज के युवा वर्ग में खासा उत्साह नजर आया। जीशान ने बताया कि ताजिये के जरिये हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। इमाम हुसैन ने इस्लाम की रक्षा के लिए कुर्बानी दी। उन्होंने बताया कि सोमवार को करबला में ...

Muharram 2017 : मुहर्रम क्या हैं कब मनाया जाता हैं। ,ताजिए का जुलूस क्यों निकला जाता हैं। - Times Bull

Happy Muharram 2017 : मुहर्रम क्या हैं कब मनाया जाता हैं। क्या है ताजिया जुलूस का महत्व. TrendingFestivalMuharram · By Times Bull On Sep 30, 2017 0 · Muharram 2017. मुहर्रम का इस्लामी महीना यानि इस्लामी नया साल की शुरुआत है। यह पैगंबर मुहम्मद, हज़रत इमाम हुसैन के युवा पोते की शहादत की याद उनके अनुयायियों को दिलाता है। ताज़िया मुहर्रम के दिनों में मुसलमान/ शिया लोग अपने पैगंबर मुहम्मद के पोते हजरत इमाम हुसेन की कब्र के प्रतीक रूप में बनाते है। मुहर्रम का इस्लामी महीना यानि इस्लामी नया साल की शुरुआत है। यह पैगंबर मुहम्मद, हज़रत इमाम हुसैन के युवा पोते की शहादत की याद उनके ...

इमाम हुसैन की याद में निकाले गए ताजिये - दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता, हरिद्वार: इमाम हुसैन की याद में ज्वालापुर और आस-पास के देहात में ताजिये निकाले गए। जागरण संवाददाता, हरिद्वार: इमाम हुसैन की याद में ज्वालापुर और आस-पास के देहात में ताजिये निकाले गए। मजलिस, लंगर और फातिहाख्वानी का सिलसिला भी जारी रहा। रविवार को मोहर्रम माह की 10 तारीख पर इमाम हुसैन व करबला के शहीदों को जगह-जगह खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी। पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती और चौथे खलीफा हजरत अली के बेटे इमाम हुसैन कर्बला की जंग में शहीद हो गए थे। हक की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन असत्य के आगे नहीं झुके और अपनी शहादत से दुनिया को यह पैगाम दिया कि सत्य ...

जानिए क्यों मनाया जाता है 'मोहर्रम' पर मातम, क्या है इसका इतिहास - Hindustan हिंदी

'मुहर्रम' इस्लामी साल पहला महीना होता है। इसी महीने से इस्लाम का नया साल शुरू होता है। इस महिने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा (Day Of Ashura) कहा जाता है, इसी दिन को अंग्रेजी कैलेंडर में मोहर्रम कहा गया है। क्यों मनाया जाता है मोहर्रम मोहर्रम के महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को इराक के बयाबान में जालिम यजीदी फौज ने शहीद कर दिया था। हजरत हुसैन इराक के शहर करबला में यजीद की फौज से लड़ते हुए शहीद हुए थे। इमाम हुसैन को इस वजह से थी यजीद से नाइत्तेफाकी इस्लाम में सिर्फ एक ही खुदा की इबादत करने के लिए कहा गया है।

आज रात और कल दिन में निकलेंगे ताजियों के जुलूस - दैनिक भास्कर

राजसमंद | जिलेभर में हजरत इमाम हुसैन की याद में शनिवार रात और रविवार दिन में ताजिये का जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस... राजसमंद | जिलेभर में हजरत इमाम हुसैन की याद में शनिवार रात और रविवार दिन में ताजिये का जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस राजसमंद, रेलमगरा, कुरज, कुंवारिया, कुंभलगढ़ देवगढ़, आमेट, लसानी में मुस्लिम समुदाय की ओर से मातम मनाते हुए ताजिये का जुलूस जाएगा। राजनगर में शनिवार रात को ताजिया का मुख्य जुलूस हुसैनी चौक से रवाना होगा। वहीं यह जुलूस फिर रविवार दोपहर 12 बजे हुसैनी चौक से ही रवाना होगा। वहीं कांकरोली माटा मोहल्ला में मोहर्रम महीने के दौरान शुक्रवार ...

कत्ल की रात आज, ताजिया जुलूस कल निकाला जाएगा - दैनिक भास्कर

मुस्लिमसमुदाय की ओर से पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में 1 अक्टूबर को जिलेभर में... मुस्लिमसमुदाय की ओर से पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में 1 अक्टूबर को जिलेभर में मोहर्रम मनाया जाएगा। इस दिन मातमी धुनों के साथ ताजिया जुलूस निकाला जाएगा। इससे एक दिन पहले 30 सितंबर को कत्ल की रात मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि करीब 1400 साल पहले मोहर्रम महीने की 10वीं तारीख को कर्बला के मैदान में मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इन दिनों पैक के जरिए मोहर्रम आने का संदेश दिया जा रहा है। ताजिया ...

मुकाम पर पहुंचे ताजिए, मस्जिदों में दुआएं की - दैनिक भास्कर

कोटा| हजरतमोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम और इमाम हसन की याद में शुक्रवार रात ताजिए मुकाम पर पहुंचे। शनिवार को शहर... कोटा| हजरतमोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम और इमाम हसन की याद में शुक्रवार रात ताजिए मुकाम पर पहुंचे। शनिवार को शहर के श्रीपुरा इलाके में ताजिए घूमाए जाएंगे। रविवार को शहादत की रात को विभिन्न स्थानों पर अखाड़े निकाले जाएंगे। ताजिए जुलूस व्यवस्था समिति संयोजक पूर्व पार्षद उमर सीआईडी ने बताया कि जुमे की नमाज में शहर की सभी मस्जिदों में शहिदाने करबला वालों की याद में जिक्रे हुसैन हुआ। करबला की दास्तां पर तकरीर की गई। स्टेशन क्षेत्र में मौलाना ...

Muharram 2017: जानिए भारत में इस वर्ष कब है मुहर्रम, नहीं है ये जश्न का दिन - Jansatta

Muharram/Ashura 2017 Date in India: मुहर्रम में एक विशेष दिन सभी मुस्लिम समाज के लोग शोक मनाते हैं। ये दिन मुहर्रम महीने का 10 वां दिन होता है। Author जनसत्ता ऑनलाइन September 30, 2017 20:29 pm. 1. Shares. Share · Next. Muharram 2017 Date India: किस दिन है इस वर्ष मुहर्रम। मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है। इसे एक बहुत पवित्र महीना माना जाता है। इसे हिजरी भी कहा जाता है। इसे मुस्लिम संप्रदाय के लोग मनाते हैं। हिजरी सन की शुरुआत इसी महीने से होती है। इस्लाम धर्म में चार पवित्र महीने होते हैं, उनमें से एक पवित्र महीना मुहर्रम का होता है। मुहर्रम शब्द में से हरम का मतलब होता है किसी ...

कौन थे इमाम हुसैन, किसने उजाड़ी थी कर्बला की बस्ती? - रिलीजन भास्कर

मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर का पहला महीना है। इस महीने में इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। Replay. Prev; |; View Again. कौन थे इमाम हुसैन, किसने उजाड़ी थी कर्बला की बस्ती? +2और स्लाइड देखें. मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर का पहला महीना है। इस महीने में इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। याजीद की सेना के विरुद्ध जंग लड़ते हुए इमाम हुसैन के पिता हजरत अली का संपूर्ण परिवार मौत के घाट उतार दिया गया था और मुहर्रम के दसवें दिन इमाम हुसैन भी इस युद्ध में शहीद हो गए थे। मुहर्रम के दसवें दिन (1 अक्टूबर, रविवार) ही मुस्लिम संप्रदाय द्वारा ताजिए निकाले जाते हैं। लकड़ी, बांस व ...

नवीं मुहर्रम पर निकाला गया अलम का जुलूस - अमर उजाला

नवीं मुहर्रम के मौके पर देर शाम चौक पर ताजिए रखे गए। लोगों ने इमाम हुसैन की याद में नियाज दिलाई। सारी रात मजलिसों का सिलसिला चला। इससे पहले आठवीं के जुलूस में अकीदतमंदों ने सीने पर मातम किया और अलम का जुलूस निकाला। अकीदतमंदों ने कर्बला में शहीद हुए लोगों के नाम सबील बांटी। मुहर्रमी बाजे की धुन के साथ निकले अलम के जुलूस में चल रहे लोग सीने पर मातम करते चल रहे थे। आंखों में आंसू और दिलों में गम का एहसास कर्बला की याद दिला रहा था। मोहम्मद साहब के नवासे हजरत अली के बेटे इमाम हुसैन ने कर्बला में अपने परिवार के 72 लोगों के साथ शहादत दी थी। उन्हीं की याद में आज भी ...

इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है मुहर्रम - Samachar Jagat

इंटरनेट डेस्क। इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन है। इमाम हुसैन अल्लाह के रसूल (मैसेंजर) पैगंबर मोहम्मद के नाती थे। यह हिजरी संवत का प्रथम महीना है। मुहर्रम एक महीना है, जिसमें शिया मुस्लिम दस दिन तक इमाम हुसैन की याद में शोक मनाते हैं। इस्लाम की तारीख में पूरी दुनिया के मुसलमानों का प्रमुख नेता यानी खलीफा चुनने का रिवाज रहा है। ऐसे में पैगंबर मोहम्मद के बाद चार खलीफा चुने गए। लोग आपस में तय करके किसी योग्य व्यक्ति को प्रशासन, सुरक्षा इत्यादि के लिए खलीफा चुनते थे। जिन लोगों ने हजरत अली को अपना इमाम ...

हक और इमान की राह पर चलने की सीख देता है मोहर्रम : मुख्यमंत्री - खास खबर

जयपुर। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने मोहर्रम (1 अक्टूबर) पर अपने संदेश में कहा है कि मोहर्रम माह से इस्लामिक नए साल की शुरुआत होती है और यह महीना हमें मैदान-ए-कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाता है। राजे ने कहा कि हक और इमान की राह पर चलते हुए दी गई हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत से हमें सीख मिलती है कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, व्यक्ति हक की राह पर चले और बातिल के सामने नहीं झुके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुहर्रम के इस मुबारक महीने में हम सभी प्रदेशवासी संकल्प लें कि अपने मुल्क की आन-बान-शान की हिफाजत के लिए हम हर तरह का बलिदान देने ...

मुहर्रम 2017: इस तरह से मुहर्रम का महीना बदल गया गम के माह में - अमर उजाला

मुहर्रम इस्लाम धर्म में आस्था रखने वालों का प्रमुख त्योहार है। इस्लाम धर्म के मानने वाले इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के गम में उनको इस दिन याद करते हैं। मुहर्रम को इस्लामी साल का पहला महीना माना जाता है जिसे हिजरी भी कहा जाता है। आशूरे के दिन यानी 10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई थी, जिसका विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। पढ़ें- दशहरा 2017: जानिए पांच ऐसे स्थान जहां पर होती है रावण की पूजा. कैसा लगा. AddThis Sharing Buttons. Share to Facebook Share to Twitter Share to WhatsApp Share to Email Share to Pinterest. Comments. Login to comment. Showing 0 of 0 comments ...

#Muharram जाने ताजिया का क्या महत्व है - Tahlka News

मुहर्रम दुनिया में इमाम हुसैन का बलिदान दिवस के रूप में मानती है हर साल की तरह, इस साल भी, जहां-जहां भी हुसैन को मानने वाले हैं वो इस बलिदान को अपने अलग तरीके से याद कर करते है.मुहर्रम के रोज़ इस्लाम धर्म के लोग मकबरे के आकार के ताज़िये के सामने मातम करते दिखाई देते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से पड़ने वाला पहला महीना मुहर्रम, इमाम हुसैन की शहादत का प्रतीक बन है। वही इमाम हुसैन, जिन्हें भारत में जन-जन तक मुंशी प्रेमचंद ने अपने मशहूर नाटक 'कर्बला' के जरिए लोगों तक पहुंचाया। मुस्लिम इतिहासकारों के मुताबिक मुहर्रम का महीना कई मायनो में खास है. एक तो इस महीने में पैगंबर ...

मुहर्रम 2017: इस मातम की सूरत बदलनी चाहिए... - Firstpost Hindi

शनिवार को दुनिया इमाम हुसैन का बलिदान दिवस मना रही है. हर साल की तरह, इस साल भी, जहां-जहां भी हुसैन के चाहने वाले हैं वो इस बलिदान को अपने-अपने तरीके से याद कर रहे हैं. लेकिन पिछले नौ-दस बरसों में हुसैन के इस गम को मनाने में कुछ ऐसे परिवर्तन भी देखने को भी मिल रहे हैं, जो समय के साथ होने ही चाहिए थे. 10 अक्टूबर 680 ई. में ये घटना घटी थी और आज 1337 साल बाद भी अगर ये गम जिंदा है तो इसलिए कि जुल्म भी जिंदा है. दरअसल, जुल्म के खिलाफ इतना बड़ा बलिदान, खुद आगे बढ़कर, किसी ने नहीं दिया. बादशाह यजीद की शक्ल में, जुल्म जब हुसैन की तरफ बढ़ा तो हुसैन के चाहने वाले, हुसैन के भाई, बेटे, ...